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UGC चाहता है कि यूनिवर्सिटी के छात्र ‘गाय विज्ञान’ की परीक्षा दें, V-Cs से इसे बढ़ावा देने को कहा

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर के विश्वविद्यालयों से कहा है कि वो छात्रों को ‘कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा’ देने के लिए प्रोत्साहित करें, जो एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है जिसे लोगों की ‘गौ विज्ञान’ की जानकारी को परखने के लिए आयोजित किया जा रहा है.

आयोग ने परीक्षा के बारे में जानकारी को व्यापक रूप से प्रसारित करने के लिए कहा है.

ये परीक्षा, जो 25 फरवरी को ऑनलाइन आयोजित की जाएगी, उन सभी छात्रों के लिए होगी जो प्राइमरी, सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्कूलों, तथा कॉलेजों में पढ़ रहे हैं. आम लोगों में कोई भी व्यक्ति, चार घंटे की ये परीक्षा दे सकता है, जो अंग्रेज़ी के अलावा 12 स्थानीय भाषाओं में कराई जाएगी.

सोमवार को सभी विश्वविद्यालयों को भेजे गए एक नोटिस में यूजूसी सचिव रजनीश जैन ने वाइस चांसलरों से कहा कि ‘इस पहल का व्यापक प्रचार किया जाए’.

नोटिस में, जिसकी प्रतिलिपि दिप्रिंट के हाथ लगी है, कहा गया है, ‘जैसा कि आप जानते हैं राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (आरकेए), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार, जो फरवरी 2019 में स्थापित किया गया था, देश में देसी गाय की आर्थिक, वैज्ञानिक, पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, और आध्यात्मिक प्रासंगिकता से जुड़ी जानकारी, फैलाने का काम कर रहा है. राष्ट्रीय कामधेनु आयोग 25 फरवरी 2021 को, एक अखिल भारतीय ऑनलाइन ‘कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा’ आयोजित करने जा रहा है, जो प्राइमरी, सेकंडरी, और सीनियर सेकंडरी स्कूलों/ कॉलेजों/ विश्वविद्यालयों के छात्रों, तथा सभी नागरिकों के लिए होगी’.

जैन ने आगे लिखा, ‘मैं आपसे ये आग्रह करने के लिए लिख रहा हूं कि इस पहल का व्यापक प्रचार करें और छात्रों को इस परीक्षा हेतु पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित करें. इसे आपके विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की जानकारी में भी लाया जा सकता है’.

परीक्षा में बैठने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र दिए जाएंगे.


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गाय के बारे में जागरूकता

जनवरी में परीक्षा की घोषणा करते हुए आरकेए प्रमुख वल्लभभाई कथीरिया ने कहा था कि इस इम्तिहान की ज़रूरत है, क्योंकि गाय के वैज्ञानिक गुणों के बारे में लोगों में ज़्यादा जानकारी नहीं है.

कथीरिया ने कहा था, ‘भारत में गौमाता पूजनीय है लेकिन आम लोगों को इसके गुणों के बारे में जागरूक करने की दिशा में पिछले कुछ सालों में खास काम नहीं किया गया है’.

उन्होंने ये भी कहा था कि ये इम्तिहान, न केवल ‘जानकारीपूर्ण परीक्षा’ का काम करेगा, बल्कि भारतीय लोगों को अवगत कराएगा कि ‘दूध देना बंद करने के बाद भी, गाय के अंदर कितनी क्षमताएं और व्यवसायिक संभावनाएं हैं, जिन्हें अभी तक खोजा नहीं गया है’.

कथीरिया ने कहा था, ‘इसके वेस्ट प्रोडक्ट, जैसे गाय का गोबर और मूत्र, जो सस्ते और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, स्वाभाविक तरीके से सड़नशील, और पर्यावरण के अनुकूल हैं. इसलिए, गाय उद्यमी इनका प्रयोग करके गौपालन को दीर्घकालिक बना सकते हैं, जो आगे चलकर देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकता है’.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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