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मुस्कुराती हुई सबको रुलाकर चली गईं दिप्रिंट हिन्दी की संपादक रेणु अगाल

दिप्रिंट हिन्दी की संपादक रेणु अगाल का बुधवार रात निधन हो गया. बीते महीने 25 मार्च को दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में वो गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं. उनका अंतिम संस्कार नोएडा में किया जा रहा है.

दुर्घटना के बाद उन्हें दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अपोलो अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाने के बाद उन्हें नोएडा स्थित कैलाश अस्पताल में शिफ्ट किया गया जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली.

2018 में दिप्रिंट से जुड़ी रेणु अगाल ने अपने कैरियर की शुरुआत फाइनेंशियल टाइम्स से की. जिसके बाद उन्होंने बीबीसी में लंबे समय तक काम किया. उन्होंने समाचार एजेंसी यूएनआई और एसियन ऐज में भी अपनी सेवाएं दी थीं.

बतौर बीबीसी वर्ष 1996 में रेणु अगाल ने बीबीसी लंदन में प्रोड्यूसर के तौर पर शुरुआत की और जल्द ही प्रमुख समाचार कार्यकर्मों के अलावा युवाओं के लिए प्रसारित होने वाले लोकप्रिय कार्यक्रम ‘नई पीढ़ी’ को भी प्रस्तुत किया.

बता दें कि रेणु अगाल ने बीबीसी के लिए लंदन और दिल्ली स्थित दोनों जगहों पर काम किया था.

पत्रकार के अलावा उन्होंने दो प्रसिद्ध प्रकाशनों में भी बतौर संपादक भूमिका निभाई. उन्होंने पेंग्विन इंडिया और उसके बाद जगरनॉट में अपनी सेवाएं दीं.

मध्य प्रदेश की रहने वाली रेणु अगाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से अपना स्नातक किया और उसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

रेणु अगाल के परिवार में उनके माता-पिता, बड़ी बहन, बहनोई और 2 भांजियां हैं.

‘तुम्हारी बहुत याद आएगी रेणु अगाल’

दिप्रिंट के एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता ने उन्होंने याद करते हुए कहा कि उनका जाना हमारे लिए काफी बड़ा नुकसान है. गुप्ता ने कहा कि उन्होंने काफी कम समय में हिन्दी की एक मजबूत टीम बनाई. हम उन्हें याद करेंगे.

पिछले 30 सालों से रेणु अगाल की दोस्त और बीबीसी में सहयोगी रहीं ज्योत्सना ने उन्हें याद करते हुए दिप्रिंट से कहा, ‘रेणु को घूमने का बड़ा शौक था. इत्तेफाक ऐसा था कि बीबीसी में एक साथ काम करते हुए जब भी लंदन जाना हुआ मैं भी वहीं थी. कम से कम 1995 से लेकर 2010 तक.’

उन्होंने कहा, ‘हमने ब्रिटेन में काफी तफरी एक साथ की है. वो बस छुट्टी मिलते ही कहीं न कहीं घूमने का प्लान बना लेती थी. एक बार मैंने कहा कि दुनिया घूमने की इतनी जल्दी क्यों हैं तुम्हें? रिटायरमेंट के बाद के लिए भी कुछ छोड़ दो. उसने कहा, नहीं दोस्त, क्या पता कल हो न हो. अगर जिंदा रहे भी तो हाथ पैर काम करेंगे ये कोई जरूरी नहीं है.’

बीबीसी के पत्रकार रेहान फज़ल ने दिप्रिंट से कहा, ‘रेणु अगाल का इस तरह जाना दिल तोड़ गया. हम दोनों ने बीबीसी में अपना सफर एक साथ शुरू किया था. वो मुझसे एक हफ्ते पहले लंदन पहुंच गई थीं. वो ही मुझे अपने साथ लेकर बीबीसी ऑफिस गई थीं. उन्होंने ही मुझे कंप्यूटर पर काम करना सिखाया था. लंदन की सड़को की ख़ाक छाननी हो, कहीं रेस्तरां में खाने जाना हो, कोई नई फ़िल्म देखनी हो, रेणु और मैं हमेशा साथ रहते.’

उन्होंने कहा, ‘रेडियो में न जाने कितने शो हम दोनों ने साथ साथ किए. उनकी शख्सियत की सबसे खास बात थी उनका आत्मविश्वास और दूसरों को हमेशा अहसास दिलाना कि मैं हूं ना.’

भारतीय जनसंचार संस्थान में प्रोफेसर आनंद प्रधान ने उनके जाने पर कहा, ‘ओह! बहुत दुखद. यह कैसा क्रूर समय है!! क्या कहूं? स्तब्ध हूं.’

राज्य सभा टीवी में लंबे समय तक पत्रकार रहे अरविंद कुमार सिंह ने कहा, ‘रेणु जी जैसी प्रतिभाशाली पत्रकार का असमय जाना बहुत पीड़ाजनक और पत्रकारिता को बड़ा नुकसान है. सादर नमन.’

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा, ‘एक व्यक्ति और पत्रकार के रूप में रेणु अगाल बहुत खुशमिज़ाज, संजीदा और समझदार थीं. जब भी मिलीं गर्मजोशी से. उनका इस तरह अचानक चले जाने सचमुच स्तब्धकारी है.’

रेणु अगाल की लंबे समय से दोस्त, लेखक और संपादक गीता श्री ने उन्हें याद करते हुए कहा, ‘अलविदा रेणु !! अगले जन्म में फिर मिलेंगे. हर यात्रा में साथ साथ जाते थे हम. अंतिम यात्रा में अकेली चली गई… जब मैं प्रस्थान करुंगी तो मुझे वहां का मानचित्र कौन समझाएगा?’

बीबीसी के पत्रकार और उनके साथ काम कर चुके राजेश प्रियदर्शी ने कहा, ‘बुरा वक़्त कैसा होता है यह अप्रैल का महीना हमें दिखा रहा है. बीबीसी की पुरानी साथी, ज़ोरदार पत्रकार और बेहतरीन प्रसारक रेणु अगाल ने भी साथ छोड़ा. रेणु कुछ दिनों पहले सड़क हादसे का शिकार हुई थीं. नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया. ऊर्जा और गर्मजोशी से भरपूर रेणु हमारे दौर की बेहतरीन जर्नलिस्ट थीं, इन दिनों हिंदी ‘द प्रिंट’ का संपादन कर रही थीं.’

प्रियदर्शी ने कहा, ‘रेणु से वीमेन प्रेस क्लब में लंच पर मिलने का करार था जो अब कभी पूरा नहीं होगा. विदा रेणु, जब भी बीबीसी के हमारे पुराने दिनों की बात होगी तुम्हारी बहुत याद आएगी.’

एनडीटीवी में पत्रकार प्रियदर्शन ने उन्हें याद करते हुए कहा, ‘करीब दो घंटे एक तस्वीर खोजता रहा- रेणु अगाल के साथ. वह बहुत प्यारी सी तस्वीर थी.‌ जाने कहां खो गई.‌ अब कभी नहीं मिलेगी. उसकी सौम्य मुस्कुराहट बेशक हम तक लौट लौट आती रहेगी.’

(दिप्रिंट हिन्दी के लिए किए गए रेणु अगाल की सभी रिपोर्ट्स और लेख आप यहां पढ़ सकते हैं)

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