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महिला नक्सली की पुलिस हिरासत में कथित आत्महत्या पर सवाल, भाजपा आज भी बनाएगी विधानसभा में मुद्दा

रायपुर : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला में गुड़से ग्राम पंचायत की सरेंडर करने वाली कथित महिला नक्सली पांडे कवासी की 23 फरवरी को पुलिस हिरासत में हुई मौत से पुलिस की कार्यवाही संदेह के घेरे में आ गई है. वहीं पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी. गुरुवार को विधानसभा में विपक्ष के ध्यानाकर्षण या स्थगन प्रस्ताव के तहत मामले में होगी चर्चा.

पुलिस ने दिप्रिंट को बताया कि मृतका की मौत का मुख्य कारण फंदे से झूलने के कारण दम घुटना है. लेकिन पीड़िता के परिवार और ग्रामीणों के आरोपों के बाद यह जांच का विषय है कि वह फंदे से कैसे झूली. हमसे बात करते हुए दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने बताया, ‘इसमें कोई संदेह नही है कि पांडे की मौत फंदे से झूलने के कारण दम घुटने से हुई है. ऑटोप्सी रिपोर्ट में भी यही निकलर आया है. ऑटोप्सी तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया था जिसकी विधिवत वीडियोग्राफी भी की गई है. हालांकि मृतका बाथरूम में फंदे से कैसे लटकी यह एक जांच का विषय है. मामले की जांच की जा रही है. सच्चाई जांच के बाद सामने आ जाएगी.’

बस्तर के आदिवासी नेताओं और ऐक्टिविस्ट्स ने 20 वर्षीया पीड़िता पांडे कवासी द्वारा पुलिस हिरासत में आत्महत्या के थ्योरी को गलत बताया है. पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि जिला प्रशासन द्वारा मैजेस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी. भाजपा ने पुलिस पर आदिवासी महिला की हत्या का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारी अब मामले को दबाने में लगे हैं.


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बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

हाल ही में पीड़िता के घर से लौटे स्थानीय आदिवासी संगठन बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा (BAMM) के एक जांच दल के सदस्यों ने दिप्रिंट को बताया कि मृतका को पीटा गया था और उसके शव पर मारपीट के निशाना थे. मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि पांडे के परिवार का कहना है कि उसका नक्सलियों संबंध नहीं था और उसे स्थानीय पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक टीम ने रिश्तेदार के घर से उस वक्त उठाया था जब वह वहां एक भोज कार्यक्रम में शामिल होने गई हुई थी.

दिप्रिंट से बात करते हुए जांच दल के संयोजक भारत कश्यप ने बताया कि मृतका के परिजनों ने जिला व पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनकी बेटी पांडे कवासी को बेवजह फंसाया गया था. कश्यप ने बताया, ’18 फरवरी को मृतका ग्राम पंचायत के दूसरे मोहल्ले में एक पारिवारीक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी जहां पुलिस के कुछ जवान उसे नक्सली होने के संदेह पर गिरफ्तार कर दंतेवाड़ा जिला पुलिस मुख्यालय ले गए थे. इस दौरान परिजनों की हुई मुलाकात में पांडे कवासी ने खुद के साथ हुए मारपीट व प्रताड़ना का भी जिक्र किया था. मृतका की बात सुनकर परिजनों द्वारा उसे पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश की गई लेकिन 23 फरवरी की शाम को उनको अचानक बताया गया कि पांडे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है.’

कश्यप ने मांग की कि ‘राज्य सरकार प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करे.’ बतौर कश्यप, ‘दफनाने से पुर्व समाजिक क्रिया के समय मृतका के शव पर परिवार के सदस्यों और अन्य ग्रामीण महिलाओं ने गंभीर चोट के निशान की पुष्टि की है. अन्य ग्रामीणों ने भी पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पांडे ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी हत्या हुई है.’

BAMM जांच दल के सदस्यों ने बाद में अपने द्वारा जारी एक सार्वजनिक बयान में पांडे की मौत को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना करार दिया और कहा कि पूरा घटनाक्रम संदेहास्पद नजर आता है. मामले की जांच किसी उच्चस्तरीय निष्पक्ष एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए.

मोर्चा के महा सचिव नवनीत चांद ने बताया, ‘पुलिस के अनुसार मृतका ने आत्महत्या की है. उनका कथन यदि सही भी हो तो पुलिस कस्टडी में पांडे द्वारा आत्महत्या करना विभाग की भारी चूक को दर्शाता है. राज्य सरकार को घटना की जांच CBI से करानी चाहिए.’

पुलिस ने बताया नक्सली

पुलिस अधीक्षक पल्लव ने बताया, ‘पीड़िता माओवादियों के चेतना नाट्य मंडली (सीएनएम) की सदस्या थी जो नक्सलियों के प्रचार-प्रसार का काम करती थी. उसके खिलाफ नक्सल हिंसा के दो मामले भी दर्ज थे. परिवार को 19, 20 और 21 फरवरी को पांडे से मिलने की अनुमति दी गई थी लेकिन परिजनों द्वारा घर चलने के लिए आग्रह करने पर भी वह उनके साथ नही गई. उसने पुनर्वास गृह में ही रहने की इच्छा जताई थी. हालांकि 22 फरवरी को परिजन मृतका से नहीं मिल सके क्योंकि वह बाहर गए थे और अगले दिन वापसी पर उन्हें मिलाने का आश्वासन दिया था. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना 23 फरवरी को घट गई.’

दंतेवाड़ा एसपी के अनुसार, ‘पुलिस की डीआरजी टीम 18 फरवरी को खुफिया इनपुट्स के बाद गुड़से गांव की ही रहने वाली 5 लाख की इनामी महिला नक्सली जोगी कवासी को गिरफ्तार करने गई थी. पुलिस ने जिस स्थान पर जोगी को घेरा पांडे भी वहीं मौजूद थी. पुलिस टीम पांडे को गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी लेकिन उसने स्वयं को जोगी का समर्थक बताकर साथ आने के लिए जिद्द किया. फलस्वरूप पुलिस टीम दोनों को गिरफ्तार कर जिला पुलिस मुख्यालय लेकर आई. बाद में माओवादियों के लिए राज्य की पुनर्वास नीति के अनुसार दोनो को आत्मसमर्पण करने की अनुमति दी गई थी और पुलिस लाइन में ही उनको पुलिस मेस में रहने के लिए रूम दिया गया था.’ एसपी ने दावा किया कि पांडे को उन्होंने गिरफ्तारी के बाद घर जाने को कहा था लेकिन उसने जाने से इनकार कर दिया.

विधानसभा में मंगलवार को हंगामा लेकिन बुधवार को नहीं उठा मुद्दा

मामले में बवाल मचने के बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने 2 मार्च को विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की लेकिन स्पीकर ने इसे अस्वीकार कर दिया. मांग न माने जाने पर भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा किया जिसके कारण विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत को सदन की कार्यवाई 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी थी. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और पार्टी के विधायक शिव रतन शर्मा ने आरोप लगया कि मृतका को नक्सली बताकर पुलिस द्वारा पहले सरेंडर कराया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई. शर्मा ने कहा यह पुलिस हिरासत में हत्या का मामला है और इस पर सदन में चर्चा होना चाहिए.

ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा विधायक मामले को विधानसभा में बुधवार को ध्यानाकर्षण के माध्यम से एक बार फिर उठाएंगे लेकिन ऐसा नही हुआ. बात दें कि गृह विभाग के अधिकारी विपक्ष द्वारा मामले को ध्यानाकर्षण मोशन के तहत उठाए जाने की संभावना को देखते हुए पूरी तरह से तैयारी कर चुके थे लेकिन भाजपा विधायकों ने मामले की चर्चा तक नही की.

आज को भाजपा लाएगी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव

कौशिक का कहना है कि बुधवार को विपक्ष द्वारा सदन में कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की मांग की गई थी जिसे अध्यक्ष द्वारा मान लिया गया था. लेकिन गुरुवार को फिर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से दंतेवाड़ा पुलिस की हिरासत में हुई आदिवासी बालिका की मौत का मुद्दा उठाया जाएगा. सदन में स्थगन और ध्यानाकर्षण दोनो प्रस्तावों के अंतर्गत चर्चा की जा सकती है. डिप्टी स्पीकर ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने का आश्वासन भी दिया है.’

कौशिक ने कहा, ‘दरअसल इस घटना में पहले लड़की को पुलिस द्वारा घर से नक्सली बताकर उसके घर से ले जाया गया, फिर उसकी गिरफ्तारी को सरेंडर बताकर हत्या कर दी गई. और अब हत्या को आत्महत्या बताया जा रहा है. मामले को तूल पकड़ता देख और विपक्ष द्वारा उठाए जाने के बाद अधिकारी इसे अब रफा-दफा करने में लगे हैं. इसीलिए सदन में चर्चा आवश्यक है.’

कलेक्टर ने दिया मजेस्ट्रियल जांच का आदेश

इसी बीच 2 मार्च को विधानसभा में हंगामा के बाद ही दंतेवाड़ा कलेक्टर ने मामले की मजेस्ट्रियल जांच के आदेश भी दे दिए. कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया, ‘मृतका के परिजनों द्वारा उसकी मौत को लेकर शंका जाहिर करने और जिला पुलिस के मांग के बाद इसमें मजेस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. दंतेवाड़ा एसडीएम द्वारा प्रकरण में पूरी जांच कर रिपोर्ट एक माह के भीतर देने को कहा गया है.’


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