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‘भगवान राम के लिए दान’- मुस्लिम समुदाय के लोगों ने BJP नेता के घर अयोध्या मंदिर के लिए दिया चंदा

नई दिल्ली: मुस्लिम समुदाय के कई सदस्यों ने मंगलवार को दिल्ली बीजेपी नेता विजय गोयल के आवास पर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए धनराशि इकट्ठा करने के अभियान में हिस्सा लिया.

गोयल के बाबर रोड निवास पर मौजूद एक दर्जन से अधिक मुस्लिम सदस्यों ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब ‘ और हिन्दू- मुस्लिम एकता के संदेश को बढ़ावा देना चाहते है.

गोयल ने कहा, ‘इस मौके के माध्यम से, हम एक संदेश देना चाहते हैं कि हम धर्म और जाति से ऊपर उठना चाहते हैं और हिंदू-मुस्लिम एकता और मानवता के संदेश का प्रचार करना चाहते हैं.’

दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रमुख विजय गोयल 1996-98 के दौरान दिल्ली सदर से सांसद थे और 1998 से 2004 के बीच चांदनी चौक से. गोयल ने कहा कि वह सभी समुदायों के सदस्यों के संपर्क में रहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘जब मैंने पुरानी दिल्ली के व्यापारियों से दान के लिए संपर्क किया, तो कई मुस्लिम भाइयों ने भी अपनी रुचि व्यक्त की. इसलिए मैंने अपने मुस्लिम भाइयों को आमंत्रित किया ताकि वे भी मंदिर के लिए अपना योगदान दे सकें- जिसका निर्माण हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है.’

गोयल ने यह भी कहा कि सभी हितधारकों द्वारा अपनी सहमति व्यक्त करने और सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के फैसले को स्वीकार करने के बाद मंदिर का निर्माण शुरू हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि धन इकट्ठा करने वाले अभियान में मुस्लिम लोगों की भागीदारी के आज के कार्यक्रम को भले ही सांकेतिक रूप में देखा जाए लेकिन समुदाय के कई लोग, विशेष रूप से फैजाबाद, लखनऊ और अयोध्या जैसे स्थानों से निर्माण के लिए योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर यह माना जाता है कि मुस्लिम मंदिर के निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं रखते हैं लेकिन अगर हम उन तक पहुंचते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि वे भी योगदान देना चाहते हैं.’


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‘भगवान राम को भेंट’

जामा मस्जिद क्षेत्र के मुदस्सिर खान, जो चांदनी चौक में एक दुकान के मालिक हैं, ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें एक साथी दुकानदार से इस कार्यक्रम के बारे में पता चला. खान पांच अन्य लोगों के साथ कार्यक्रम में आए थे.

अभियान में भाग लेने वाले जाफराबाद के निवासी सैयद मोहम्मद जावेद ने दिप्रिंट को बताया, ‘हम हिंदुस्तानी मुसलमान हैं. यहां तक कि जब हम खाड़ी देशों में जाते हैं, तो हमें हिंदी मुस्लिम कहा जाता है. हमारे हिंदू भाइयों की तरह, हम भी भगवान राम का सम्मान करते हैं.’

‘अल्लाह की दुआ से हमारे पास जो कुछ भी है उसे भगवान राम को अर्पित करने का यह एक अवसर है.’

जावेद ने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय हमेशा हिंदुओं के साथ भाईचारे के साथ रहता है और हम ऐसे ही रहेंगे. लेकिन कुछ राजनीतिक ताकतें मुसलमानों को अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती हैं. ये वे लोग हैं जो मंदिर का समर्थन नहीं करते हैं.’

खान ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अधिक लोग मंदिर के निर्माण में योगदान देने के लिए आगे आएंगे. कुछ मुस्लिम समूहों के विरोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘सभी पांच उंगलियां समान नहीं है. कुछ लोग स्वाभाविक रूप से इसका विरोध करेंगे, यही लोकतंत्र है’.

मौजपुर के एक सिविल इंजीनियरिंग छात्र मोहम्मद मुनीस ने कहा कि चाहे वह मंदिर हो या मस्जिद, हिंदू और मुस्लिम दोनों को पूरे दिल से योगदान देना चाहिए और वर्तमान में एक अच्छा उदाहरण पेश करना चाहिए. गौरतलब है कि मौजपुर और जफराबाद पिछले साल हुए दिल्ली दंगों में बुरी तरह प्रभावित हुए इलाकों में से है.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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