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ऑनलाइन परीक्षा को लेकर हो रहे तेजी से प्रयोग, डिजिटल डिवाइड एक बड़ी समस्या

नई दिल्ली: कोरोना महामारी से पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि भारत में इतने बड़े स्तर पर ऑनलाइन शिक्षा का प्रसार हो जाएगा. मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जारी रखने के लिए नई व्यवस्था पर विचार किया जाने लगा, जिसके बाद ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार होने लगा.

हालांकि, इससे पहले भी कुछ कोर्सेज ऑनलाइन होते थे लेकिन इनकी संख्या काफी कम थी. उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में कोरोना खत्म हो जाएगा और जिंदगी अपने पुराने ढर्रे पर चलने लगेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और शिक्षा के क्षेत्र में नए तौर तरीके खोजे जाने लगे.

ऑनलाइन असेसमेन्ट कंपनी मर्सर आई मैटल  एक ऐसी ही कंपनी है जिसने अकादमिक परीक्षाओं के डिजिटलीकरण के लिए ऑल-इन-वन इंटीग्रेटेड समाधान वेब आधारित परीक्षा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. चूंकि अकादमिक संस्थानों, प्रशासकों और छात्रों के लिए भौतिक परीक्षाएं चुनौती बन गई हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए मर्सर आई मैटल ने अपने आधुनिक डिजिटल टूल्स के साथ ऑनलाईन परीक्षा को आसान और प्रभावी बना दिया है.

इसी बारे में जानकारी देने के लिए मंगलवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया.


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कई विश्वविद्यालयों ने शुरू की ऑनलाइन परीक्षा

कोरोना से प्रभावित होती शिक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र परीक्षाएं ऑनलाइन कराए जाने पर विचार होने लगा. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) जैसे कई विश्वविद्यालयों ने इस दिशा में पहल भी की.

हालांकि, इसका कुछ संगठनों और छात्रों ने विरोध भी किया. विरोध का एक बड़ा कारण डिजिटल डिवाइड था. लेकिन साथ ही इस दिशा में भी प्रयास किए जाना लगा कि कैसे ऑनलाइन परीक्षा को ज्यादा सुगम, बेहतर और आसान बनाया जा सके.

इस कड़ी में ऐसे प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं जिससे शुरू से लेकर अंत तक परीक्षा संबंधी सभी कामों को ऑनलाइन किया जा सके. इसमें पेपर बनाने से लेकर ऑनलाइन इन्विजिलेशन और कॉपियों की जांच तक शामिल है.

मर्सर आई मैटल कंपनी के सीईओ सिद्धार्थ गुप्ता का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के लिए एक ‘नेक्स्ट जेनरेशन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘ तैयार किया है जिसकी सहायता से पूरी परीक्षा को ईमानदारी से आयोजित किया जा सकेगा.

वेबिनार के दौरान सिद्धार्थ गुप्ता, सीईओ, मर्सर आई मैटल ने कहा, ‘यह प्लेटफॉर्म भारत में शिक्षा के भविष्य को नए आयाम देगा. नए दौर के हमारे उपकरण और तरीके रिमोट ऑनलाइन परीक्षा को सक्षम बनाएंगे. आधुनिक सॉफ्टवेयर ह्यूमन एवं एआई प्रॉक्टरिंग को सुनिश्चित करता है और परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को विश्वसनीय एव भरोसेमंद बनाता है.’

उन्होंने कहा, ‘इससे परीक्षा पूरी होने के बाद प्रश्नपत्र की जांच एवं परिणामों की घोषणा भी सुरक्षित हो जाती है. पूरी प्रक्रिया लागत प्रभावी है और आज के दौर में बेहद व्यवहारिक है, जबकि ई-लर्निंग की मांग तेज़ी से बढ़ रही है.’


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ऑनलाइन परीक्षा से होगी समय की बचत

भविष्य में इस तरह से प्लेटफॉर्म्स के आने से छात्रों और अध्यापकों दोनों के लिए काफी आसानी होगी. सिर्फ एक कंप्यूटर या लैपटॉप और वेबकैम के जरिए अपने घर से ही छात्र परीक्षा दे पाएंगे और उनकी कॉपियों की जांच से लेकर रिजल्ट घोषित किए जाने तक सारे काम ऑनलाइन हो जाएंगे.

इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का भी सहारा लिया जाएगा. ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनाए जाने से समय की भी बचत होगी और किसी भी संस्थान के स्टॉफ की ऊर्जा भी बचेगी जिसे शिक्षा से संबंधित अन्य कामों में प्रयोग किया जा सकेगा.

सिद्धार्थ गुप्ता का कहना है, ‘उनके प्लेफॉर्म के जरिए कोई भी छात्र परीक्षा के दौरान बेईमानी नहीं कर पाएगा. क्योंकि इसके लिए तकनीक के प्रयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र का चेहरा स्क्रीन की तरफ ही है या नहीं. उसकी आंखों और चेहरे की दिशा के आधार पर इन्विजिलेटर्स इस बात का अनुमान लगा सकेंगे कि छात्र गलत तरीकों या मोबाइल इत्यादि किसी अन्य उपकरण की सहायता लेने की तो कोशिश नहीं कर रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘साथ ही छात्र किसी अन्य व्यक्ति की भी सहायता नहीं ले पाएगा क्योंकि डिटेक्टर्स के जरिए फ्रेम में आने वाले किसी भी अवांछित व्यक्ति या वस्तु का पता लगाया जा सकेगा.’


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डिजिटल डिवाइड है एक समस्या

इस बीच डिजिटल डिवाइड और इंटरनेट की समस्या को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत में अभी डिजिटल डिवाइड काफी ज्यादा है और इंटरनेट की धीमी स्पीड की समस्या भी कई शहरों में बनी हुई है. इस समस्या से निजात पाने के लिए ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित किए जाने की जरूरत है जिससे परीक्षा के दौरान स्लो इंटरनेट होने पर भी परीक्षा देने में छात्रों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े.

हां, जहां तक बात डिजिटल डिवाइड की है तो इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि भारत में अभी एक बड़ी जनसंख्या तमाम संसाधनों से रहित है. लेकिन समय के साथ बदलाव भी जरूरी होता है और इसे ध्यान में रखते हुए उस पर काम किए जाने की जरूरत है.


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