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डॉ कफील का CM योगी से कोविड से लड़ने में मदद का अनुरोध, सरकारी पोर्टल पर आवेदन के लिए कहा गया

नई दिल्ली: 2017 में निलंबित किए गए उत्तर प्रदेश सरकार के डॉक्टर कफील ख़ान ने, राज्य सरकार से अनुरोध किया है, कि उन्हें कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान, अपनी सेवाएं दिने की अनुमति दी जाए, लेकिन यूपी सरकार ने बाल रोग विशेषज्ञ से कहा है, कि उन्हें एक पोर्टल के ज़रिए सरकार तक पहुंचना चाहिए, जो इसके लिए बना हुआ है.

17 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे अपने पत्र में ख़ान ने, इंटेंसिव केयर यूनिट्स (आईसीयू) में अपने 15 साल के अनुभव का हवाला देते हुए, ज़ोर देकर कहा है कि अगर सरकार चाहती है, तो संकट ख़त्म होने के बाद, उन्हें फिर से निलंबन में रख सकती है.

मंगलवार को अपने पत्र की एक कॉपी के साथ उन्होंने ट्वीट किया, ‘कोरोनावायरस की दूसरी लहर त्राहि-त्राहि मचा रही है. मेरा गहन चिकित्सा विभाग में 15 साल का अनुभव, शायद कुछ ज़िंदगियां बचाने में काम आ सके’. उन्होंने आगे कहा, ‘अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि इस कोरोना महामारी में, देश की सेवा करने का अवसर दें…’

डॉ ख़ान ने दिप्रिंट से कहा, ‘सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पूरा देश, एक भारी चुनौती का सामना कर रहा है. पिछले एक साल में 1,000 से अधिक डॉक्टरों की मौत हो चुकी है, और डॉक्टरों की पहले से ही कमी है’. उन्होंने आगे कहा, ‘यूपी में स्थिति चिंताजनक है, और स्वास्थ्य देखभाल का ढांचा चरमरा गया है. ग्रामीण इलाक़ों में आरटी-पीसीआर टेस्ट मुश्किल से ही उपलब्ध हैं’.

पत्र का जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने डॉक्टर से, सरकार के सार्वजनिक निवारण पोर्टल के ज़रिए आने के लिए कहा है. सीएमओ के जवाब में, जो ख़ान ने दिप्रिंट को दिखाया, कहा गया है, ‘अगर आपके पत्र का संबंध किसी शिकायत से है, तो हम आपको बताना चाहते हैं, कि इस उद्देश्य के लिए ‘जन सुननी’ नाम से एक अधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, और उसका वेब पता भी उपलब्ध कराया गया है’. उनसे कहा गया, ‘अपनी शिकायतें दर्ज कराने और सुलझवाने के लिए, कृपया पोर्टल का इस्तेमाल करें’.


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‘संकट के बाद मुझे निलंबित कर दें’

डॉ ख़ान, गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में, 60 बच्चों की मौत के सिलसिले में, 22 अगस्त 2017 से निलंबित चल रहे हैं.

शुरू में उन्हें एक हीरो के तौर पर सराहा गया था, जब प्रत्यक्षदर्शियों ने 10 अगस्त 2017 की रात, मेडिकल कॉलेज में पैदा हुए ऑक्सीजन संकट के बीच, जिसमें 60 बच्चों की जान गई थी, उन्हें दूसरे बच्चों की जान बचाने का श्रेय दिया था.

लेकिन 22 अगस्त मामले ने एक अलग मोड़ ले लिया, और 60 मौतों का ज़िम्मेदार मानते हुए, उन्हें निलंबित कर दिया गया.

ख़ान ने दिप्रिंट को बताया कि फिलहाल वो, किसी अस्पताल के साथ काम नहीं कर रहे हैं, और डॉक्टरों के एक ग्रुप के साथ अंदरूनी इलाक़ों में घूमकर, ज़मीनी हालात का जायज़ा ले रहे हैं, और मरीज़ों को इलाज और राहत मुहैया करा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उन्हें इलाहबाद हाईकोर्ट से पहले ही एक ‘क्लीन चिट’ मिल चुकी है, और ये भी कहा कि उनके साथ सस्पेंड हुए, अन्य लोगों के निलंबन वापस लिए जा चुके हैं.

उन्होंने कहा, ‘मेरे साथ इतना भेदभाव क्यों? मैं अभी भी लोगों की सेवा करना चाहता हूं, और महामारी ख़त्म हो जाने के बाद, वो मुझे फिर से निलंबित कर सकते हैं’.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढञने के लिए यहां क्लिक करें)


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